एससी-एसटी एक्ट के मूल प्रावधानों को बहाल करने संबंधी विधेयक मंजूर, संसद में पेश होगा विधेयक

शेयर करें:

केंद्र सरकार ने अनूसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों की कई मांगों को पूरा करते हुए कुछ बडे फैसले लिए हैं। कैबिनेट की बैठक में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 यानी एससी एसटी एक्ट के मूल प्रावधानों को बहाल करने संबंधी विधेयक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गयी है।

आज केंदीय र्कैबिनेट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 यानी एससी एसटी एक्ट के मूल प्रावधानों को बहाल करने संबंधी विधेयक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। गौरतलब है कि 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एक्ट 1989 से जुड़ा एक अहम फैसला दिया था जिसमें यह कहा गया कि एससी-एसटी एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी न की जाए और अग्रिम जमानत को मंजूरी दी जाए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ देशभर में दलितों ने आंदोलन किया था। और आज कैबिनेट ने इस संबंध में अहम फैसला लिया। कैबिनेट के फैसले के बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार एससी-एसटी लोगों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

केंद्र सरकार ने अनूसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों की कई मांगों को पूरा करते हुए कुछ बडे फैसले लिए हैं। कैबिनेट की बैठक में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 यानी एससी एसटी एक्ट के मूल प्रावधानों को बहाल करने संबंधी विधेयक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गयी है।

अब सरकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित (अत्याचार रोकथाम) कानून के मूल प्रावधानों को बहाल करने वाला विधेयक संसद में लाएगी। संसद सत्र के चलते सरकार ने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी लेकिन ये साफ कर दिया कि सरकार अनूसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के केस में FIR दर्ज करने से पहले कोई प्रारंभिक जांच की जरूरत नहीं होगी। अभियुक्‍त की गिरफ्तारी करने के लिए कोई पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं होगी। CRPC की धारा 438 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्‍याचार निवारण कानून पर लागू नहीं होगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एक्ट 1989 से जुड़ा एक अहम फैसला दिया था।

इस फैसले में एक्ट के प्रावधानों को नरम करते हुए कहा था कि एससी-एसटी एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी न की जाए और अग्रिम जमानत को मंजूरी दी जाए। गौरतलब है कि मूल कानून में अग्रिम जमानत की व्यवस्था नहीं है। कोर्ट के इस फैसले के बाद इसका विरोध शुरु हो गया जिसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनरीक्षण की याचिका दाखिल की। केंद्र ने अपनी याचिका में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अधिनियम के उन प्रावधानों को बहाल करने का आग्रह किया जो कुछ अपराधों को संग्येय और गैर-जमानती बनाते हैं।

फिलहाल मामला लंबित है और अब सरकार ने तमाम संगठनों और राजनीतिक दलों की मांग के मुताबिक विधेयक लाने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री और दलित नेता रामविलास पासवान ने विघेयक के लिए पीएम मोदी का धन्यवाद किया है । पासवान ने ये भी कहा कि सरकार ने दलितों के हितों के लिए तमाम फैसले लिए हैं। सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण को जारी रखने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी ले चुकी है।

गौरतलब है कि विभिन्न उच्च न्यायालयों के आदेशों के बाद अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण रूक गया था। केंद्र ने हाल में उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था जहां कोर्ट ने कहा था कि जब तक अंतिम फैसला नहीं आ जाता वह प्रमोशन में आरक्षण मुहैया कराने पर आगे बढ़ सकता है।

केंद्र की मोदी सरकार एससी एसटी समाज के लोगों के हितों की रक्षा करने का संकल्प कई बार व्यक्त कर चुकी है। मई 2014 में एनडीए सरकार के आने के बाद से ही केंद्र ने सबका साथ सबका विकास के नारे पर अमल करते हुए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिय़े तमाम कल्याणकारी कदम उठाये हैं। इनमें मुद्रा बैंक लोन ,राष्ट्रीय एससी / एसटी हब ,अनुसूचित जातियों के लिए वेंचर कैपिटल फंड (वीसीएफ-एससी) की एक वेबसाइट और वनबंधु कल्याण योजना जैसे कदम शामिल हैं।