भारत भवन का कला संरक्षण और आब-ओ-हवा खींचती है बार-बार – पं. विश्वमोहन भट्ट

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संस्कृति मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने आज भारत भवन की 37वीं वर्षगाँठ के अवसर पर सप्ताहभर चलने वाले कार्यक्रमों का शुभारंभ किया। ग्रेमी अवार्ड प्राप्त पद्मभूषण और मोहन वीणा का अविष्कार कर संगीत दुनिया में छा जाने वाले पं. विश्वमोहन भट्ट ने वर्षगाँठ समारोह में चार चाँद लगा दिये। पं. विश्वमोहन भट्ट ने कहा कि भारत भवन में कला-संस्कृति का संरक्षण और यहाँ की आब-ओ-हवा बार-बार आने के लिये प्रेरित करती रहती है।

संस्कृति मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने भारत भवन को भारतीय संस्कृति का कला-घर कहा था। हम उनकी इस सोच को देश-दुनिया में आगे बढ़ाते रहेंगे। भारत भवन कला के क्षेत्र में न केवल देश, बल्कि सम्पूर्ण विश्व में अति महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्व. श्री स्वामीनाथन, श्री हैदर रजा, अज्ञेय जैसे बड़े-बड़े कलाकारों ने भारत भवन का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विभिन्न संस्कृतियों का पु\ज है। यहाँ हर 40-50 किलोमीटर पर संस्कृति बदल जाती है। प्रत्येक संस्कृति का संरक्षण करते हुए उसे नये आयाम दिये जायेंगे। संस्कृति मंत्री ने पं. विश्वमोहन भट्ट का आभार प्रकट करते हुए कहा कि वह विश्व में मोहन वीणा का पर्याय बन गये हैं। उन्होंने सितार, सरोद और गिटार का सामंजस्य कर अद्भुत वादन तैयार
किया है।

संस्कृति मंत्री ने लोक-कलाकार श्री सुदेश सिंह धुर्वे की एकल चित्र प्रदर्शनी और भारत के विभिन्न चित्रकारों द्वारा भोपाल, महेश्वर, ओंकारेश्वर आदि पर बनाये गये चित्रों की प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। सुश्री संगीता गोस्वामी और साथियों द्वारा मंगलाचरण की प्रस्तुति से समारोह आरंभ हुआ। पं. विश्वमोहन भट्ट का तबले पर साथ दिया सुप्रसिद्ध तबला-वादक श्री हिमांशु ने।

संस्कृति सचिव और भारत भवन की न्यासी सचिव श्रीमती रेणु तिवारी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अचानक अस्वस्थ होने से सुप्रसिद्ध तबला-वादक उस्ताद जाकिर हुसैन आज नहीं आ सके। उनका कार्यक्रम आगामी 2 मार्च को होगा। श्रीमती तिवारी ने बताया कि समारोह सप्ताह के बाद 31 मार्च तक भारत भवन में उच्च-स्तरीय कार्यक्रम होते रहेंगे। भारत भवन के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्री प्रेमशंकर शुक्ला ने आभार माना।