अस्थमा (दमा) में योगासन प्राणायाम,षट्कर्म, ध्यान से लाभ

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विश्व अस्थमा दिवस – “अस्थमा की भ्रांति को उजागर करना” है

आदर्श योग आध्यात्मिक केंद्र स्वर्ण जयंती पार्क कोलार रोड़ भोपाल के संचालक योग गुरु महेश अग्रवाल ने विश्व अस्थमा दिवस की शुरुआत, महत्व,थीम,अस्थमा के लक्षण एवं योग प्राकृतिक चिकित्सा के बारे मे बताते हुए कहा कि व्यक्ति शुभ चिंतन उपवास गहरी नींद एवं नियमित योग उचित खान पान एवं प्रदूषण से दुरी रखते हुए आजीवन स्वस्थ रह सकता हैं |

योग के माध्यम से अस्थमा के उपचार के चार समूह हैं। योगासन,प्राणायाम,षट्कर्म,और ध्यान आइए जानें इनके बारे में और इन्हे अपनाएं , किंतु ध्यान रहे कि अपना मेडिकल उपचार ना रोकें | दमा , श्वास संबंधी रोग अस्थमा मे शीर्षासन समूह, सूर्य नमस्कार,सर्वांगासन, भुजंगासन, शलभासन, धनुरासन, वीरासन, उष्ट्रासन, सुप्त वज्रासन , पश्चिमोत्तानासन, नाड़ी-शोधन प्राणायाम, सूर्यभेदन प्राणायाम, उड्डियान बंध, योग निद्रा का अभ्यास नियमित करने से लाभ मिलता है |प्राकृतिक चिकित्सा में छाती व पीठ पर धूप स्नान, छाती की सूती -ऊनी लपेट, एनिमा उपवास, गरम हाथ पैर स्नान, तेज गति के व्यायाम व स्टीम बाथ, आंवला, नींबू, संतरा अन्नानास मोसम्बी अदरक शहद, मुनक्का लहसुन अंजीर के सेवन एवं घी तेल चिकनाई मांस मछली अंडे अशुभ चिंतन से परहेज |

 

योग आसन शरीर को लचीला बनाते हैं और जीवन से भर देते हैं। प्राणायाम श्वास व्यायाम नहीं है, बल्कि शरीर में प्राण पैदा और परिसंचालित करने की एक विधि है। अस्थमा के दृष्टिकोण से, शायद यह सबसे महत्वपूर्ण पहलू है योग का। अस्थमा में बुनियादी अंतर्निहित समस्या फेफड़ों की सूजन है, और प्राणायाम से फेफड़ों में सूजन कम हो जाती है।

षट्कर्म की नेती क्रिया के अभ्यास में नाक से और कुंजल क्रिया के अभ्यास में पेट से बलगम को निकालने में मदद मिलती। शरीर से बलगम निकल देने से फेफड़ों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।ध्यान व्यक्ति के मानसिक पक्ष के साथ-साथ भावनात्मक पक्ष को प्रभावित करता है। योग हमारी जागरूकता बढ़ाता है, कारण और प्रभाव में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। जैसे-जैसे आपकी जागरूकता बढ़ती है आप देख सकते हैं कि अस्थमा का कारण क्या है।

योग गुरु अग्रवाल ने बताया कि अस्थमा फेफड़ों की एक पुरानी बीमारी है, जिसके कारण सांस लेने में समस्या होती है। अस्थमा के लक्षणों में सांस फूलना , खांसी, घरघराहट, छाती में जकड़न, थकान महसूस करना, नींद न आना, सीने में दर्द, एलर्जी, कॉमन कोल्ड आदि मुख्य रूप से शामिल हैं। ये लक्षण हर किसी में उसकी गंभीरता के आधार पर अलग-अलग होते हैं। जब लक्षण नियंत्रण में नहीं होते हैं, तो वायुमार्ग में सूजन या संकुचन आ जाता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो सकता है।

विश्व अस्थमा दिवस प्रतिवर्ष मई महीने के पहले मंगलवार को पूरे विश्‍व में मनाया जाता है। वर्तमान में वायु प्रदूषण को देखते हुए अस्थमा के रोगियों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इस बीमारी से छोटे बच्चों से लेकर वयोवृध्द जन तक प्रभावित हो रहे हैं अस्थमा विरोध की जागरूकता एवं शिक्षा हेतु इस इस दिन को संपूर्ण विश्व में मनाया जाता है। इस वर्ष के विश्व अस्थमा दिवस की थीम “अस्थमा की भ्रांति को उजागर करना” है। विषय अस्थमा से संबंधित आम तौर पर आयोजित मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने के लिए कार्रवाई करने के लिए एक कॉल प्रदान करता है जो अस्थमा से पीड़ित व्यक्तियों को इस स्थिति के प्रबंधन में प्रमुख प्रगति से इष्टतम लाभ लेने से रोकता है। *वर्ष 2020 की थीम “एनफ अस्थमा डेथ्स” थी|हर बार इसके लिए एक नई थीम चुनी जाती है।

अस्थमा के बारें मे आम गलतफहमियों हैं कि अस्थमा एक बचपन की बीमारी है; उम्र के बढ़ने के साथ ही लोग इससे बाहर निकलेंगे। अस्थमा संक्रामक है। अस्थमा पीड़ितों को व्यायाम नहीं करना चाहिए। अस्थमा केवल उच्च खुराक स्टेरॉयड के साथ नियंत्रणीय है। सच तो यह है: अस्थमा किसी भी उम्र में हो सकता है (बच्चों, किशोरों, वयस्कों और बुजुर्गों में) अस्थमा संक्रामक नहीं है। हालांकि, वायरल श्वसन संक्रमण (जैसे सामान्य सर्दी और फ्लू) अस्थमा के हमलों का कारण बन सकते हैं।

अस्थमा के प्रमुख कारण :- हवा में मौजूद परागकण,धूम्रपान करना, लाइफ स्टाइल में बदलाव, इंडोर गेम्स को प्रोत्साहन, वातावरण के प्रति प्रतिकूलता,आनुवांशिकी, प्रदूषण ,फैटी फूड का सेवन, हाउस होल्ड केमिकल्स,धूल-कण,पेट्स, बैक्टीरिया और वायरस
वायरल इंफेक्शन : वायरल इंफेक्शन से ही अस्थमा की शुरुआत होती है। युवा यदि बार-बार सर्दी, बुखार से परेशान हों तो यह एलर्जी का संकेत है। सही समय पर इलाज करवा कर और संतुलित जीवन शैली से बच्चों को एलर्जी से बचाया जा सकता है। समय पर इलाज नहीं मिला, तो धीरे-धीरे वे अस्थमा के मरीज बन जाते हैं।

अस्थमा से लड़ने के लिए इन बातों का ध्यान रखें
1 डॉक्टर की मदद से अपना पर्सनल अस्थमा मैनेजमेंट प्लान तैयार करें। इस प्लान में दवाएं कब लेनी हैं और अस्थमा के जोखिम कारकों से बचने के उपायों पर गौर करें।
2 अपने चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाओं का ही सेवन करें, ताकि अस्थमा के लक्षणों से राहत मिल सके। इससे वायुमार्ग से संबंधित सूजन और जलन को आप नियंत्रित कर सकेंगे।
3 अस्थमा के उन जोखिम कारकों के बारे में अपनी जानकारी बढ़ाएं, जो लक्षणों को बढ़ाकर आपकी स्थिति को बदतर बना सकते हैं।
4 लक्षण कब गंभीर हो सकते हैं, इसके लिए डॉक्टर से बात करें।
5 यदि आपको अस्थमा का दौरा पड़ता है, तो इसके लिए हमेशा खुद को तैयार रखें। अस्थमा अटैक से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को कहीं लिखकर रखें, ताकि जब भी आपको अस्थमा अटैक आए, इसके बारे में दूसरों को समझने में कोई समस्या ना हो। अस्थमा का गंभीर दौरा आने पर आपको और आपके परिवार के सदस्यों को क्या करना चाहिए, इस बारे में सही दिशा-निर्देश से संबंधित एक कार्ड बनाकर रखें।