हस्त मुद्रा योग से करें पांच तत्वों का संतुलन, रहें आजीवन निरोगी -योग गुरु महेश अग्रवाल

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योग गुरु अग्रवाल ने बताया कि हमारा शरीर पाँच तत्वों से बना हैं अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी एवं जल | शरीर में इनका एक निश्चित अनुपात होता है, लेकिन शरीर में जब इन तत्वों में असंतुलन पैदा होता है तो रोग होने लगते है, यदि हम इन तत्वों का संतुलन करना सीख जायें तो बीमार हो ही नहीं सकते एवं यदि हो भी जायें तो इन तत्वों को संतुलित करके आरोग्य पुनः प्राप्त कर सकते हैं | हमारे हाथ में अंगूठा – अग्नि, तर्जनी – वायु, मध्यमा – आकाश, अनामिका – पृथ्वी, एवं कनिष्ठिका जल तत्व पांचो तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं |

ऋषि-मुनियों ने हजारों साल पहले इसकी खोज कर ली थी एवं इसका प्रयोग करके ही वे लोग स्वस्थ रहते थे । क्योंकि ये शरीर में चैतन्य को अभिव्यक्ति देने वाली कुंजियाँ हैं। शरीर का निर्माण करने वाले पाँचों तत्व अंगुलियों के नीचे स्थित (जड़ों में) पाँच चक्रों से जुड़े होते हैं। यह एक-एक चक्र कई-कई नाड़ियों में जीवन ऊर्जा के प्रवाह को संचालित करता है। विभिन्न मुद्राओं के प्रयोग से हम इन चक्रों को जाग्रत कर पुराने एवं असाध्य रोगों को भी दूर कर आजीवन स्वस्थ रह सकते हैं। अग्नि-आँख को, वायु-त्वचा को, आकाश – कान को, पृथ्वी-गंध को एवं जल-तत्व श्वास को नियंत्रित करता है।

ज्योतिष (हस्तरेखा) के अनुसार अँगूठा-मंगल, तर्जनी बृहस्पति, मध्यमा शनि, अनामिका- सूर्य, तथा कनिष्ठिका चन्द्रमा को दर्शाती है। इन पाँचों अंगुलियों से हजारों मुद्राएं बनाई जा सकती हैं, परन्तु उल्लिखित मुद्राओं का ही हमें प्रयोग करना चाहिए।

मनुष्य के हाथों की अंगुलियां तीन-तीन हिस्सों (पोरों) में विभक्त हैं । शीर्ष भाग (अग्रभाग), मध्य भाग एवं मूल (जड़) भाग । अंगुली को मोड़कर अंगूठे से दबाने पर मध्य भाग क्रियाशील होता हैं अंगुलियों के तीनों भाग अलग-अलग कार्य करते हैं, किसी अंगुली के शीर्ष भाग को अंगूठे के शीर्ष भाग से मिलाने पर उस अंगुली विशेष का तत्व शरीर में सम होने लगता है, अगर अंगूठे के शीर्ष भाग को किसी भी अंगुली के मध्य भाग में रख कर दबायें तो उस अंगुली विशेष का तत्व शरीर में घटने लगता है। (या यह भी होता है कि अगर अंगुली को मोड़कर उसे अंगूठे की जड़ में लगाकर अंगूठे से दबाते हैं तो उसका (अंगुली का) तत्व शरीर में घटने लगता है।अगर अंगूठे के शीर्ष भाग को किसी अंगुली के मूल (जड़) भाग में लगायें तो उस अंगुली का विशेष तत्व शरीर में बढ़ने लगता है।

स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए कई मुद्राएं प्रयोग में लाई जाती हैं, जैसे- पृथ्वी मुद्रा – बलवर्द्धक, सूर्य मुद्रा -कब्जहर, अपान मुद्रा -कब्ज और उदर रोगनाशक , अग्नि प्रचण्ड मुद्रा – असाध्य संक्रमण हेतु , सुरभि मुद्रा – त्रिदोष-वात, पित्त, एवं कफहर , भ्रमर मुद्रा – सभी प्रकार की एलर्जी हेतु , मातंगी मुद्रा – यकृत, पेट एवं आँतों के लिये , शंख मुद्रा – गले के रोगों में उपयोगी, पाचन क्रिया बढ़ाने के लिए , पुषाण मुद्रा – मिचली और गैस हेतु , शुचि मुद्रा – पुराना कब्ज , मुस्टिका मुद्रा – यकृत और मंदाग्नि हेतु , अपान वायु मुद्रा – पेट की वायु, गैस, पित्त विकार, पेट दर्द एवं हृदय रोग में रामबाण का काम करती है।, वरुण मुद्रा – शरीर का रुखापन दूर करने के लिए , पंच तत्व मुद्रा – किसी भी प्रकार के दर्द निवारण के लिए, प्राण मुद्रा – आंखों के लिए, उदान मुद्रा – थाइराइड के लिए, हाकिनी मुद्रा – याददाश्त बढ़ाने के लिए, पान मुद्रा – सरदर्द माइग्रेन के लिए, नमस्कार मुद्रा – मित्रता एवं विनम्रता हेतु, गरुण मुद्रा – मासिक धर्म की अनियमितता दूर करने के लिए, पूर्वाचार्यों का भी यही मानना है कि पाँच तत्वों के सन्तुलन से शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मन और भावनाओं का भी शुद्ध और शुभ विकास होता है।

आदर्श योग आध्यात्मिक योग केंद्र स्वर्ण जयंती पार्क कोलार रोड़ भोपाल के संचालक योग गुरु महेश अग्रवाल कई वर्षो से निःशुल्क योग प्रशिक्षण के द्वारा लोगों को स्वस्थ जीवन जीने की कला सीखा रहें है वर्तमान में भी ऑनलाइन माध्यम से यह क्रम अनवरत चल रहा है |योग प्रशिक्षण के दौरान साधकों को हाथों की अंगुलियों के पोरो को आपस में मिलाने से बनने वाली हस्त मुद्राओं के लगाने से होने वाले लाभ के बारे में भी बताया जाता हैं |