सियाचिन में जवानों के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

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ए पी जे अब्दुल कलाम के बाद 14 साल बाद राष्ट्रपति कोविंद सियाचिन बेस पहुंचे जहां उन्होने युद्धस्मारक पर श्रदाजलि दी। राष्ट्रपति ने जवानों के शौर्य की सराहना की और दिल्ली आने पर राष्ट्रपति भवन देखने का न्योता भी दिया। दुनिया के सबसे मुश्किल रणक्षेत्रों में शामिल सियाचिन बेस कैंप पर तैनात जवानों के हौसले और बुलंद हुए जब देश के राष्ट्रपति और सशस्त्र सेनाओं के सुप्रीम कमांडर रामनाथ कोविंद उनके बीच पहुंचे।

दुनिया के सबसे मुश्किल रणक्षेत्रों में शामिल सियाचिन बेस कैंप पर तैनात जवानों के हौसले और बुलंद हुए जब देश के राष्ट्रपति और सशस्त्र सेनाओं के सुप्रीम कमांडर रामनाथ कोविंद उनके बीच पहुंचे। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के बाद सियाचिन का दौरा करने वाले ये दूसरे राष्ट्रपति हैं। इसके पहले साल 2004 में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सियाचिन का दौरा किया था। इस प्रकार रामनाथ कोविंद 14 वर्षों में सियाचिन की यात्रा करने वाले भारत के पहले राष्ट्रपति बन गये हैं।

राष्ट्रपति ने सियाचिन युद्द स्मारक पर श्रधांजली अर्पित की। 13 अप्रैल 1984 को सियाचिन ग्लैशियर पर भारततीय सेना के ऑपरेशन मेघदूत की शुरूआत से अब तक शहीद हुए 11 हजार सैनिको के बलिदान का प्रतीक है। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कुमार पोस्ट का भी दौरा किया. राष्ट्रपति ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे ऊचें युध्दक्षेत्र सियाचिन में भारतीय जवान विषम परिस्तिथितियों में डटे हुए हैं।

राष्ट्रपति विशेष हेलिकॉप्टर के जरिये सियाचिन बेसकैंप पहुंचें. दौरे पर राष्ट्रपति ने सियाचिन से सटी भारत-पाक नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की। राष्ट्रपति ने जवानो से कहा कि आप राष्ट्र के गौरव और हमारी स्वाधीनता के प्रहरी हैं। यू तों भारत पाकिसतान के बीच 2003 के सघंर्षविराम के बाद से सियाचिन में शांति है लेकिन सेना का जवान अपने देश और देशवासियों के लिए, अपनी जान की परवाह किए बगैर..सीमा पर चौकस है ।