राज्यसभा में अमित शाह का पहला भाषण

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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राज्यसभा में अपने पहले मैराथन भाषण में एनडीए सरकार की उपलब्धियां गिनाई। राष्‍ट्रपति के अभिभाषण पर धन्‍यवाद प्रस्‍ताव की शुरुआत की, भाजपा अध्यक्ष ने किसान और ग़रीबोन्मुख बजट की सराहना की।

एक सांसद के तौर पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी पारी की शुरूआत की, और राज्यसभा में अपना पहला भाषण दिया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हो रही चर्चा की शुरूआत करते हुए अमित शाह ने जहां पूर्ववर्ती यूपीए सरकार को घेरा, वहीं एनडीए सरकार की तमाम उपलब्धियां भी गिनाई। शाह ने तीन तलाक पर कांग्रेस की आलोचना की और कहा कि उनकी सरकार मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाने को लेकर दृढ़ संकल्पित है।

सोमवार का दिन राज्यसभा के लिए दो मायनों में खास रहा। एक तो ये कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में बहस की शुरुआत हुई और दूसरी ये कि धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत अमित शाह ने की। बतौर सांसद यह पहला मौका था जब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने राज्यसभा के भीतर किसी मसले पर अपनी बातें रखीं। धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शाह ने खोमचे वालों की तुलना भिखारियों के साथ करने के लिए कांग्रेस की जमकर आलोचना की और कहा कि बेकार रहने से मेहनत करना बेहतर है, और इसे भीख मांगना नहीं कहा जा सकता। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने स्‍टार्टअप इंडिया जैसे रोजगार पैदा करने वाले अनेक कदम उठाये हैं।

अमित शाह ने पिछली यूपीए सरकार पर जोरदार हल्ला बोला और कहा कि 2014 में एनडीए की सरकार बनने के वक्त सरकार को जो कुछ विरासत में मिली उस गड्ढे को भरने में ही सरकार का बहुत सारा समय चला गया। अमित शाह ने जम्मू कश्मीर और तीन तलाक के मसले पर भी अपनी बातें रखीं। कश्मीर के मुद्दे पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि पिछले 35 सालों में जितनी शांति कश्मीर में नहीं थी उतनी शांति आज हो गई है और कश्मीर सबसे सुरक्षित जगह है। वहीं तीन तलाक पर अमित शाह ने कांग्रेस की आलोचना की और कहा कि उनकी सरकार मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाने को लेकर दृढ़ संकल्पित है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में दूसरे अन्य दलों के नेताओं ने भी अपने अपने विचार रखे। हालांकि इससे पहले राज्यसभा की कार्यवाही शुरु होते ही विपक्षी सदस्यों की तरफ से लगातार हो हंगामा होता रहा और सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित भी करनी पड़ी थी।