तीनों कृषि कानूनों से बदलेगी किसानों की तकदीर और तस्वीर: तोमर

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ग्वालियर। केन्द्रीय पंचायतीराज, ग्रामीण विकास और कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि नए कृषि बिल से देश के किसानों की तकदीर और तस्वीर बदलेगी। यह कानून किसानों के हित संरक्षण और उनकी मांगों के अनुरूप बनाया गया है। इस कृषि कानून में समर्थन मूल्य को खत्म नहीं किया जायेगा। कृषि उपज मंडियों को भी बंद नहीं किया जायेगा।

किसान अपनी फसलों को देश के अन्य राज्यों जहां उसे उचित मूल्य मिलेगा बेच सकेंगे। उन्होंने यह बातें बुधवार को ग्वालियर में आयोजित भव्य किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत सहित अन्य राज्यों के किसानों ने केन्द्र सरकार द्वारा पारित किसान हितैषी अध्यादेश का तहेदिल से स्वागत किया है।

वहीं पंजाब, हरियाणा के किसानों को विपक्षी राजनैतिक दलों द्वारा भडक़ाया जा रहा है, ताकि वे किसानों की आड़ में राजनैतिक रोटियां सेक सकें। उन्होंने कहा कि नए कृषि कानून में किसानों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखकर ही बनाया है। यह कानून पूरी तरह किसान हितैषी है जिसे किसानों को समझना होगा। उन्होंने देश के सभी किसानों से अपील की है कि वे किसी भी राजनैतिक दल के बहकावे में न आएं।

केन्द्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2014 से लगातार किसानों के कल्याण के लिये प्रयास कर रहे हैं। किसानों की फसलों से आमदनी का धंधा तभी बन सकेगा, जब परंपरागत खेती को छोडक़र किसान आधुनिक तकनीकी को अपनाकर विभिन्न आयामों से जुड़ें, ताकि किसान आमदनी मुनाफे की श्रेणी में आ जाये।

इसके लिये केन्द्र सरकार के साथ प्रदेश सरकारों को आगे कदम बढ़ाने की आवश्यकता है। पहले समर्थन मूल्य लमसम तय होता था, लेकिन अब केन्द्र सरकार पहले किसानों द्वारा लगाई लागत को पूछेगी, जितनी किसानों ने लागत लगाई है उसमें 50 प्रतिशत लाभ जोडक़र अब समर्थन मूल्य घोषित किया जायेगा।

प्रधानमंत्री सम्मान निधि पर चर्चा करते हुये केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इस योजना में किसानों को एक वर्ष में 3 किश्तों में 6 हजार रुपये दिये जाते थे। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को धन्यवाद देते हुये कहा कि वे भी 2-2 हजार रुपये दो-दो किश्तों में देंगे। इस तरह अब किसानों की यह निधि 10 हजार रुपये तक पहुंच जायेगी। इस योजना में केन्द्र सरकार 75 हजार करोड़ रुपये किसानों के खातों में डाल रही है।

उन्होंने कहा कि बड़े परिवारों में बंटवारे हो जाने से छोटे-छोटे भागों में खेत हो गये हैं। प्रधानमंत्री ने इन छोटे-छोटे मझोले किसानों के लिये कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिये एफपीओ बनाया है। इस एफपीओ में छोटे-छोटे किसान न ट्रेक्टर ले सकते है और न अन्य कृषि उपकरण इसके लिये उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे 5-5 बीघा के 100-100 किसान मिलकर एफपीओ की योजना में लाभ लेंगे तो उन्हें उन्नत कृषि उपकरण के साथ-साथ थोक में खाद बीज के दामों में रियायत मिल जायेगी और इस योजना का लाभ भी उठा सकेंगे।

उन्होंने कहा कि एफपीओ के माध्यम से उद्यानिकी फसलों में कम लागत आयेगी और उत्पादन भी बढ़ेगा। कृषि अद्यौसंरचना पर केन्द्र सरकार ने एक लाख करोड़ का प्रावधान किया है। इसमें 20 हजार करोड़ मछली पालन को बढ़ावा देने, 15 हजार करोड़ पशुपालन, 4 हजार करोड़ हर्वल फसलों, 5 हजार करोड़ मधुमक्खी पालन और 10 हजार करोड़ छोटे-छोटे प्रोसेसिंग मशीनों के लगाने पर खर्च होंगे।

उन्होंने कहा कि साढ़े 17 हजार करोड़ प्रधानमंत्री किसान योजना में और 1 हजार 128 करोड़ रुपये कॉपरेटिव के लिये जारी किये गये है। उन्होंने कृषि सुधार के लिये आये अध्यादेश में किसानों को होने वाले फायदों को भी गिनाया। इस अवसर पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आतिथ्य में रीवा में आयोजित कार्यक्रम का एलईडी पर सीधा प्रसारण किया गया।