अफगानिस्तान: आत्मघाती हमलों में 40 लोगों की मौत

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धमाकों से दहला अफगानिस्तान। काबुल और नज़दीकी इलाकों में कई बम धमाकों में 11 पत्रकारों सहित कम से कम 40 लोगों की मौत। अफगानिस्‍तान की राजधानी काबुल में आत्‍मघाती बम विस्‍फोट की तीन अलग-अलग घटनाओं में 11 पत्रकारों, सहित कम से कम 40 लोग मारे गए और 65 घायल हो गये। अफगानिस्‍तान के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार काबुल के शास दराक क्षेत्र में सोमवार को सुबह भीड़भाड़ वाले इलाके में दो बम धमाके हुए।

आतंकवादी गुट-इस्‍लामिक स्‍टेट ने इन हमलों की जिम्‍मेदारी ली है। इस बीच, दक्षिण कंधार प्रांत में विदेशी सैनिकों के काफिले पर एक आत्‍मघाती हमले में ग्‍यारह बच्‍चे मारे गए। कंधार के गवर्नर के प्रवक्‍ता सैयद अजीज अहमद अजीजी ने मृतकों की संख्‍या की पुष्टि करते हुए बताया कि घायलों में रुमानिया के पांच सैनिक और दो अफगान पुलिसकर्मी शामिल हैं

राजधानी काबुल सोमवार सुबह एक के बाद एक हुए दो आत्मघाती हमलों से थर्रा गयी । पहला आत्मघाती हमला मध्य शास डराक क्षेत्र में हुआ। यहां नाटो के मुख्यालय सहित कई दूतावास हैं। इसके साथ ही वहां पर एनडीएस खुफिया सेवा का ऑफिस है । दूसरा हमला शहरी विकास और आवास मंत्रालय के मुख्यालय के बाहर हुआ । पहले हमले के तुरंत बाद दूसरा हमला हुआ जिसमें पत्रकारों को निशाना बनाया गया ।

अधिकारियों के मुताबिक दूसरा हमलावर पैदल आया था। पहले हमले के बाद घटना की रिपोर्टिंग करने आए संवाददाताओं की भीड़ में वह पत्रकार के वेश में था। हमले में एएफपी के मुख्य फोटोग्राफर शाह मरई और पांच अन्य पत्रकारों सहित कम से कम 25 लोगों की मौत हो गयी। हमले में 49 लोग घायल हुए हैं। मरनेवालों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

एएफपी ने अपने मुख्य फोटोग्राफर मरई सहित , वन टीवी के दो पत्रकार , टोलो न्यूज के एक पत्रकार और जहां टीवी के एक पत्रकार के मारे जाने की पुष्टि की है। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली है। एक बयान में उसने कहा है कि उसके दो आत्मघाती हमलावरों ने हमले को अंजाम दिया ।

इस बीच दोपहर बाद अफगानिस्तान में एक विदेशी काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ जिसमें 11 बच्चों की मौत हो गयी। गौरतलब है कि इस्लामिक स्टेट समूह के स्थानीय सहयोगी संगठन और तालिबान देशभर में लगातार हमले कर रहे हैं। ये संगठन न केवल सरकारी संस्थाओं और सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे हैं, बल्कि विदेशियों पर भी हमले कर रहे हैं। ये लोग अफगानिस्तान में इस्लामिक कानून स्थापित करना चाहते हैं।