प्रशासन और पुलिस का गंठजोड़ जनता पर पड़ा भारी

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सतना | अमौधा तालाब के सीने पर प्रशासन और पुलिस का गंठजोड़ जनता पर पड़ा रहा है भारी। प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को पुलिसिया विकास के लिए यही जगह सबसे मुफीद लगी। तालाब के अगोर क्षेत्र को मिट्टी से भरकर बनाए जा रहे थाना का विरोध शुरू से ही किया जाता रहा है। वार्ड के लोगों ने पार्षद की अगुवाई में महीनेभर आंदोलन किया। प्रदर्शन और ज्ञापन देकर अपनी बात रखी। लेकिन, प्रशासन और पुलिस को तो थाना यहीं बनाना था। तालाब को चाहने वाले मुठ्ठीभर लोग थे। शायद कमजोर भी।

विरोध के बाद भी निर्माण जारी रहा और अब भी जारी है। ग्राउंडफ्लोर के बाद पहली मंजिल का काम चल रहा है। सुनवाई न होने पर एनजीटी की चौखट पर दस्तक दी गई। वहां से भी स्थगन मिला पर फिर भी निर्माण चलता रहा। अब गर्मियों के दिन शुरू होने वाले हैं। वार्ड के लोगों को चिंता है कि, तालाब के बचे हुए पानी पर उनका अधिकार रहेगा भी या नहीं क्यों कि, अंदेशा है कहीं तालाब का पानी निर्माण कार्य के लिए ही रिजर्व न कर दिया जाए।

वार्ड के लोग आशंकित हैं कि उन्हें तालाब के पानी के उपयोग से किसी न किसी बहाने रोका जा सकता है। हालांकि, प्रशासन की तरफ से फिलहाल ऐसा कुछ नहीं किया गया है। बावजूद, अमौधा तालाब का जलभराव क्षेत्र कम हो जाने से आसपास के लोगों के लिए गर्मी में संकट खड़ा हो सकता है। वार्उ के आंदोलन में शामिल लोगों के मुताबिक थाना की नींव में उनकी जरूरतें और भवनाएं दफ़न हैं। अधिकारी तो बाहर से आते हैं उन्हें विकास के नाम पर कुछ न कुछ तो करना ही है। फिर चाहे, तालाब भरकरथाना ही क्यों न बनाना हो। लेकिन, हमारा तालाब से लगाव है। हम उसे मरते हुए नहीं देख सकते।