प्रेस की आजादी के साथ एक वाचडॉग भी जरूरी: वैंकेया नायडू

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राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर पत्रकारिता के लिए राष्ट्रीय पुरुस्कार प्रदान करते हुए उप राष्ट्रपति वैकेया नायडू ने कहा कि प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया के लिए एक वाचडाग होना चाहिए।पत्रकारिता में नियमन की जरूरत पर बल देते उपराष्ट्रपति ने कहा कि नियमन होना चाहिए लेकिन इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि इससे प्रेस की आवाज ना दबें।

आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर देशभर में कई कार्यक्रमों का आयोजन हुआ तो पत्रकारिता के लिए राष्ट्रीय पुरुस्कार भी बांटे गये। लेकिन मीडिया के बढ़ते स्वरूप में उसके स्वनियमन के बारे में भी बहस तेज़ हो गई है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर पत्रकारिता के लिए राष्ट्रीय पुरुस्कार प्रदान करते हुए उप राष्ट्रपति वैकेया नायडू ने कहा कि प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया के लिए एक वाचडाग होना चाहिए।पत्रकारिता में नियमन की जरूरत पर बल देते उपराष्ट्रपति ने कहा कि नियमन होना चाहिए लेकिन इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि इससे प्रेस की आवाज ना दबें।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए मीडिया के लोगों, विशेष रूप से संवाददाताओं और कैमरामैनों द्वारा विभिन्न समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए किये जा रहे कड़ेपरिश्रम की सराहना की है।

प्रधानमन्त्री ने अपने संदेश में कहा कि जिनकी आवाज नहीं सुनी जाती है, उनकी समस्याओं को उजागर करने में मीडिया की भूमिका प्रशंसनीय है। पीएम ने कहा कि पिछलेतीन वर्षों में मीडिया ने स्वच्छ भारत मिशन को बहुत मजबूती प्रदान की है और स्वच्छता के संदेश को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया है।

इस मौके पर केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने मीडियाकर्मियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता का प्रयोग जिम्मेदारी और तार्किक तरीके से किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर फेक न्यूज की बात करते हुए उन्होने कहा कि प्रेस के लिए स्वनियमन ही सबसे अच्छा नियमन है।

स्मृति ईरानी ने कहा कि हमे प्रेस की उन आवाजो को समर्थn देनाचाहिए जो दबाब के आगे झुकती नही है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मोके पर सभी मीडियाकर्मियों को बधाई। सत्य में शक्ति है – जागरुकता जरूरी है। एक स्वतंत्र प्रेस मजबूत लोकतंत्र के लिए जरूरी है

राष्ट्रीय प्रेस दिवस 1966 से प्रति वर्ष मनाया जाता है। प्रथम प्रेस आयोग ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा एवं पत्रकारिता में उच्च आदर्श कायम करने के उद्देश्य से एक प्रेस परिषद् की कल्पना कीथी। इसके तहत चार जुलाई 1966 को भारत में प्रेस परिषद् की स्थापना की गई जिसने 16 नंवबर 1966 से अपना विधिवत कार्य शुरू किया। तभी से प्रतिवर्ष 16 नवंबर को भारत में एक स्वतंत्र औरजिम्मेदार प्रेस की मौजूदगी के प्रतीक के तौर पर राष्ट्रीय प्रेस दिवस के रूप में मनाया जाता है।