स्वच्छता अभियान बना एक जनआंदोलन

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जब कोई बड़ा बदलाव आता है तो उसके लिए एक शुरूआत की जरूरत होती है। एक ऐसी शुरूआत हुई थी तीन साल पहले गांधी जयंती के दिन। स्वच्छता की जिस देशव्यापी मुहिम का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिगुल बजाया, आज वह एक विशाल जन आंदोलन बन चुकी है। पूरा देश एकजुट होकर इस मुहिम के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आगे बढ़ रहा है। देश की नामचीन हस्तियों से लेकर आम लोगों की भागीदारी ने वाकई स्वच्छाग्रह को जनांदोलन की शक्ल दे दी है।

कश्मीर से कन्याकुमारी और सिल्चर से सौराष्ट्र देश का हरे-एक कोना स्वच्छ हो। स्वच्छता की अलख जगाने की शुरूआत प्रधानमंत्री ने की थी, वो आज एक जनक्रान्ति बन चुकी है। प्रधानमंत्री की इस मुहिम से लोग लगातार जुड़े रहे हैं, देश की नामचीन हस्तियों से लेकर आम लोगों की भागीदारी ने वाकई स्वच्छाग्रह को जनांदोलन की शक्ल दे दी है।
स्वच्छता अभियान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि, “देश में सभी के पास शौचालय हों,प्रकृति साफ़-सुथरी हो,नदी,तालाब,जंगल,पहाड़ भी स्वच्छ बनें यही तो संकल्प है।”

स्वच्छता अभियान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहते हैं, “यह स्वच्छता का अभियान 2019 तक हर हिंदुस्तानी का स्वभाव बनना चाहिए। स्वच्छता हमारे रगों में,हमारे जहन में, हमारे विचार में, हमारे आचार में स्वच्छता का परम स्थान होना चाहिए और इससे बड़ी पूज्य बापू को कोई श्रद्धांजलि नहीं हो सकती है। स्वंय बापू कहते थे कि आजादी और स्वच्छता दोनों में से मेरी पहली पसंद स्वच्छता रहेगी। आजादी से भी ज्यादा महत्व गंदगी से मुक्ति का हिंदुस्तान, यह बापू का सपना था। आजादी के 70 साल हो चुके हैं, 2019 में 150वीं जयंती मना रहे हैं हम क्यों न उसके लिए करें।”

स्वच्छता अभियान कैसे एक जनआंदोलन बन चुका है इसका एक उदाहरण हमें केरल के अलापुजा जिले से मिलता है।
नदियां जीवनदायिनी हैं लेकिन फैक्ट्रियों से निकले कचरे ने केरल अलापुजा जिले की कुट्टेमपेरुर नदी का दम घोंट दिया। नदी का जीवन ख़तरे में था ऐसे में गांव के लोगों ने संकल्प लिया। बुधनूर ग्राम पंचायत के 700 ग्रामीणों ने नदी को पुनर्जीवित करने की कमान संभाली। वक्त ने करवट ली और नदी ज़िदा हो उठी।

ये कहानीयां बदलाव की हैं। ये कहानीयां एक संकल्प की हैं। ये कहानीयां एक प्रयास की हैं। ना उम्र तकाज़ा है ना कोई वर्ग। बिहार के बक्सर की 80 साल की बुजुर्ग इंद्रशानी कुंवर की कहानी प्रेरणा देती है। 80 साल की उम्र में इंद्रशानी कुंवर ने खुद ही अपना शौचालय बना डाला। लोगों ने भी हिम्मत को सलाम किया और इंद्रशानी के लिए शौचालय बनवाने में मदद की।

लोगों की भागीदारी से, संस्थाओं की ज़िम्मेदारी से और कई कार्यक्रमों की वजह से स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है और इसमें शामिल हुए हैं देश की कई अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली नामचीन हस्तियां भी। फिल्मी जगत से अनुष्का शर्मा और अमिताभ बच्चन सरीख़े कई लोग आगे आ रहे हैं।

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर भी अब स्वच्छता की अलख जगा रहे हैं तो मैदान में दुनिया में अपनी धाक जमाने वाली कोहली एंड कंपनी भी स्वच्छता ही सेवा की मुहिम में आगे बढ़कर हिस्सा ले रही है। पूरा देश रहन-सहन और हमारी आदतों में शुमार गंदगी फैलाने की प्रवृति से निजात पाने और स्वच्छता के प्रति आग्रह के संकल्प के साथ उठ खड़ा हुआ है। इस प्रयास में सरकार के प्रयास हैं तो लोगों की भागीदारी भी। सही मायनों में स्वच्छ भारत के लिए आग्रह यूं ही आगे बढ़ा तो ज़रूर एक साफ-सुथरे भारत पर हर एक नागरिक गर्व कर सकेगा।

2014 से शुरू हुआ स्वच्छता का ये सफर आज तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। 6 राज्य पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त हो गये है। इनमें हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात, सिक्किम और केरल शामिल है। देश में अब तक 5 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। 25 लाख से ज्यादा गांव खुले में शौच मुक्त हो चुके है। देश के 211 जिले पूरी तरह से ओडीएफ बन गये हैं।

2014 में जहां देशभर में खुले में शौच मुक्त क्षेत्र की बात करें तो ये आंकड़ा 38.70 प्रतिशत था। जो अब जागरूकता के बाद 70 प्रतिशत (69.17%) के करीब पहुंच गया है। अब आम आदमी स्वच्छता को सेवा मानकर अपने आस-पास की गंदगी को साफ कर रहा है। स्वच्छता अभियान के तहत अबतक 5 करोड़ शौचालयों का निर्माण हुआ है, 25 लाख गांव और 211 जिले खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं।