4 साल मोदी सरकार: व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया हुई सरल, ग्रामीण इलाकों में खोला जा रहा बीपीओ सेन्टर

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भारत दुनिया के लिए विकास का अगला इंजन होगा, देश की अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ है। देश में विदेशी निवेश बढ़ा और की क्षेत्रों में अहम सुधार हुए हैं। पिछले चार साल के अंदर स्वरोजगार बढ़ा है, सरकार कारोबारी सुगमता के लिए कई आर्थिक सुधार किए हैं और इस दिशा में वह लगातार आगे बढ़ रही है।

भारत ने विश्व की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 2018 में 30 अंको की जबदस्त उछाल हासिल किया है। अब भारत विश्व की ओवरऑल रैंकिंग में 100 वें स्थान पर आ गया है, जो कि पिछले साल 130 वें स्थान पर था। जहां एक ओर व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया भी सरल हो गई है वहीं 250 करोड़ रुपये से कम के कारोबार वाले छोटे कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट कर 30% से घटाकर 25 फीसद कर दिया गया है । वाणिज्य मंत्रालय,single window clearance और लाइसेंस की प्रक्रियाओं में तेजी लाने के लिए अहम कदम उठाए गए है..बिजेनस रैंकिंग सुधरने से भारत में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा

सबसे बड़े आर्थिक सुधार के रूप में लागू किए गए जीएसटी से ने भी कारोबारी सुगमता को बढा़ने के में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। जीएसटी पंजीकरण अब 3 दिनों के भीतर ऑनलाइन किया जा सकता है। कारोबार टैक्स भरने और रिफंड लेने की प्रक्रिया आसान। लागू करने के बाद इस संख्या में 40 लाख नए व्यापारी जुड़ गए हैं, जो पहले के मुकाबले 60 फीसदी ज्यादा है। कारोबारी सुगमता को सबसे बड़ी छलांग टैक्स सुधारों के जरिए मिली है और इसकी वजह रहा ऑनलाइन व्यवस्था को सही तरीके से अमल में लाना। आने वाले सालों में भारत के लिए 50वीं रैंकिंग हासिल करना मुमकिन है

ग्रामीण इलाकों में तेजी से खुल रहें हैं बीपीओ

ग्रामीण इलाकों में भी तेजी के साथ बीपीओ सेन्टरों को खोला जा रहा है। बस्तर में खोले गये इस बीपीओ में काम करने वाले युवाओं ने अपनी जीवटता से वर्तमान परिस्थितियों को बदला है और नक्सल प्रभावित इलाकों में सफलता की नई इबारतें गढ़ रहे है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में राज्य का सबसे बड़ा बीपीओ सेन्टर है जिसमें 480 युवा जॉब कर रहे है लेकिन जल्द ही इनकी तादात 1000 तक पहुंच जायेगी।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके बीजापुर के मनोज भोगम ने कभी सोचा भी नहीं था कि उसे कॉल सेन्टर में जॉब मिलेगी, वो भी अपने घर के पास। मनोज के हालात ऐसे थे कि नक्सलियों ने उसके भाई को मार दिया और गांव के स्कूल को जला दिया। डगर कठिन थी और स्थिति चुनौतिपूर्ण। लेकिन आज मनोज छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े बीपीओ दांतेवाड़ा में जॉब कर रहा है। जो उसने कभी सपने में भी सोचा ना था।

जगदलपुर की बद्रिका अर्की की कहानी भी कुछ ज्यादा अलग नहीं है। मुश्किलों से झुंझते हुए विनीता आज शान से बीपीओ में काम कर रही है। दिव्यांग पैट्रिक तिक्कर ने कभी सोचा भी नहीं था कि वो यहां जॉब कर पायेगा क्यों कि उसे लगता था कि ऐसे जॉब सिर्फ दिल्ली , मुम्बई और बंगलुरू जैसे शहरों में ही होते है।

दांतेवाड़ा के इस बीपीओ में काम कर रहे 480 युवाओं की कहानियां आपको प्रेरित करेंगी। कि किस मुश्किल हालातों से गुजर कर ये यहां पहुँचे है। केन्द्र सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने इन युवाओं के हौंसले को एक उड़ान दी है।