4 साल मोदी सरकार: स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी पहल

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हृदय की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए स्टेंट इम्प्लांट बहुत ज़रूरी हो जाता है। लेकिन कई ऐसे लोग भी हैं जो मंहगे स्टेंट की कीमत चुकाने में सक्षम नहीं होते। ऐसे मेक इन इंडिया के तहत देश में ही स्टेंट निर्माण एक अहम क़दम है।

देश में स्वास्थ्य क्षेत्र मे क्रिटकल केयर आम जनता की पहुंच से बाहर था। महंगी स्वास्थ्य सेवाओं में दिल की बीमारियों मे इस्तेमाल होनेवावा उपकरण है स्टेंट जो नसों में रक्त प्रवाह को संतुलित रखने के लिये लगाया जाता है। महंगी स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी वजह आयातित स्वास्थ्य उपकरणों है। हालांकि, मेक इन इंडिया मिशन से प्रेरित होकर गुजरात के गांधीनगर की एक ऐसी ही स्टेंट निर्माण इकाई ने इस उपकरण को देश में ही बनाने का बीड़ा उठाया।

तकनीक रुप से आधुनिक यूनिट की स्थापना करना भी खुद मे एक चुनौती थी। इसके साथ ही स्टेंट निर्माण इकाई की कंपनी मे बने स्टेट्स को विदेशी कंपनियों की गुणवत्ता के सामने भी खरा उतरना था। इस कंपनी ने ना केवल घरेलू स्तर पर सस्ते स्टेंट बनाकर गरीबों को उम्मीद की एक नयी किरण दिखायी बल्कि रोजगार सृजन के रास्ते भी खोले हैं।