असम : सोशल मीडिया पर तालिबान के समर्थन में पोस्ट करने वाले 14 लोग गिरफ्तार

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असम पुलिस ने तालिबान के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि इन पोस्ट्स में अफगानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण का समर्थन किया गया था। असम पुलिस ने शुक्रवार रात को ये गिरफ्तारियां की थी, जिसकी जानकारी आज दी गई है। इन लोगों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA), IT एक्ट और दूसरी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

कहां से हुई गिरफ्तारियां?
पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, कामरुप मेट्रोपॉलिटन, बारपेटा, धुबरी, करीमगंज जिलों से दो-दो और दरांग, चाचर, हैलाकांडी, दक्षिणी सलमारा, गोलपारा और होजाई जिले से एक-एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार हुए लोगों में एक छात्र भी शामिल है। स्पेशल DGP जीपी सिंह ने शनिवार को ट्वीट कर इन गिरफ्तारियों की जानकारी दी। उन्होंने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए लोगों से सोशल मीडिया के इस्तेमाल के दौरान सावधानी बरतने की अपील भी की है।

सोशल मीडिया पर नजर रख रही है पुलिस
DIG वॉयलेट बरुआ ने ट्वीट पर लिखा, ‘असम पुलिस सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नुकसानदायक तालिबान समर्थक कमेंट्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रही है। हम ऐसे लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कर रहे हैं। अगर आपकी सामने ऐसी बातें आती हैं तो कृपया हमें इस बारे में जानकारी दें।’ एक और अधिकारी ने बताया कि पुलिस अलर्ट है और सोशल मीडिया पर भड़काऊ कंटेट पर नजर रख रही है।

सपा सांसद पर हुआ था ‘देशद्रोह’ का मामला दर्ज
इससे पहले तालिबान को लेकर दिए गए बयान के बाद उत्तर प्रदेश के संभल से सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क मुश्किलों में फंस गए थे। संभल पुलिस ने इसी सप्ताह उनके खिलाफ देशद्रोह और अन्य धाराओं में FIR दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि बर्क का बयान देशद्रोह की श्रेणी में आता है। दो लोगों ने बर्क पर स्वंतत्रता सेनानियों की तालिबान से तुलना करने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दी थी।

बर्क ने क्या बयान दिया था?
समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए बर्क ने तालिबान का समर्थन करते हुए कहा था, “जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, तब हमारे देश ने आजादी की लड़ाई लड़ी। अब तालिबान अपने देश को आजाद करना चलााना चाहते हैं। तालिबान वह ताकत है, जिसने रूस और अमेरिका जैसे मजबूत देशों को अपने मुल्क में जमने नहीं दिया।” उन्होंने कहा कि तालिबान अफगानिस्तान में ताकत है और वहां के लोग इसके नेतृत्‍व में आजादी चाहते हैं।

गौरतलब है कि तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है और फिलहाल वहां हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। हजारों की संख्या में लोग देश छोड़कर जाने चाहते हैं। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद तालिबान ने युद्ध समाप्ति की घोषणा करते हुए कहा था कि वह जल्द ही नई शासन व्यवस्था की जानकारी देगा। तालिबान ने साफ कर दिया है कि अफगानिस्तान में लोकतंत्र नहीं होगा और वह परिषद के जरिये सरकार चला सकता है।