वायु प्रदूषण का बच्चों पर हानिकारक प्रभाव

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प्रदूषित हवा का एहसास हमें तब होता है जब स्मॉग हो या अधिक धुल या धुआं हो । लेकिन प्रदूषित हवा बाहरी वातावरण के साथ घर के अंदर भी होती है । आइये जानते हैं वो कौन से कारक हैं जो घर के अंदर प्रदूषण को बढ़ाते है और उनका कितना असर बच्चों पर पड़ सकता है।

वायु प्रदूषण बच्चों के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालता है । प्रदूषित कण सिर्फ बाहर ही नहीं घर के अंदर उपस्थित रहते हैं ।

घर के अंदर प्रदूषण : स्रोत
बीड़ी या सिगरेट का धुंआ
घर के अंदर हुक्का पीना
चूल्हा जलाना
लकड़ी, उपले या कोयला जलाने से
कॉइल जलाना
अगरबत्ती जलाना
कमरे में कृत्रिम खुशबू के लिए स्प्रे करना

प्रदूषण के प्रभाव से बच्चों के स्वास्थ्य पर तात्कालिक व दीर्घकालीन प्रभाव होते हैं ।

वायु प्रदूषण : बच्चों में खतरे के लक्षण
सांस लेने में परेशानी
अत्याधिक खांसी
बच्चे में चिड़चिड़ापन
अत्याधिक रोना
सांस तेज़ चलना
सांस लेने पर सिटी की आवाज़ होना (वीजिंग)
सांस लेते समय छाती में गड्ढे पड़ना
हाथों और होठों का नीला पड़ना
घर के अंदर प्रदूषण को कम कैसे करें ?
लकड़ी, उपले या कोयले का उपयोग घर में ईंधन के लिए न करें
कॉइल, अगरबत्ती का प्रयोग न करें
बाहर प्रदूषण अधिक होने पर घर की खिड़कियां व दरवाजों को बंद कर लें
कम प्रदूषण करने वाले ईंधन का उपयोग करें
घर में हवा की आवा जाही पर्याप्त हो
घर में धूम्रपान न करें
कृत्रिम खुशबू वाले स्प्रे घर के अंदर न करें
बच्चों को धुएं से दूर रखें

बच्चों को प्रदूषित वातावरण से दूर रखें और ध्यान दें कि आपके घर के अंदर का वातावरण साफ़ और स्वच्छ हो ।