मोहर्रम का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया गया

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प्रयागराज: प्रयागराज  मोहर्रम यानी कर्बला की जंग इमाम हुसैन की शहादत में ऐसे मनाया जाता है या पर्व यह इस्लामिक नए साल का पहला पर्व है। मोहर्रम का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया गया।बच्चों बड़े बूढ़ों ने धूमधाम और उत्साह से मोहर्रम का पर्व मनाया।

 

जिसे मुस्लिम समुदाय के लोग गम के रूप में मानते हैं । इस दिन इमाम हुसैन और उनके अनुयायियों की शहादत को याद किया जाता है।

 कौन बोलेगा वह सजदा हुसैन का खंजर  तले भी सर झुका न सका था  हुसैन का।  मिट गई नस्लें या जिद कर्बला की खाक में कयामत तक रहेगा जमाना हुसैन का

ऐसे सारे अल्फाजों के गम को जाहिर करते हुए निकाला गया ताजिया।  मोहर्रम इस्लामिक वर्ष का पहला महीना होता है इस महीने की दसवीं तारीख को मुहर्रम मनाया जाता है।

  जिसे उर्दू में आशूरा भी कहा जाता है।  यह इस्लामिक समुदाय का नए साल का पहला पर्व है।  इसे शिया मुसलमान समुदाय के लोग गम के रूप में मानते हैं।

कहते हैं कि इसी दिन इमाम हुसैन और उनके अनुयायियों की शहादत को याद किया जाता है।  पूरी दुनिया के मुसलमान मोहर्रम की 9 और 10 तारीख को रोजा रखते हैं।

  मस्जिदों और घरों में इबादत करते हैं।  हजरत मोहम्मद के मित्र इब्ने अब्बास के मुताबिक हजरत ने कहा कि जिसने मोहर्रम की 9 तारीख का रोजा रखा।

  उसके 2 साल के गुनाह माफ हो जाते हैं।  और मोहर्रम की एक रोजे का 30 रोजों के बराबर फल मिलता है।

मोहर्रम महीने की दसवीं तारीख को ताजिया का जुलूस बड़ी धूमधाम से निकाला गया ।

 ताजिया लकड़ी और कपड़ों से और बहुत ही सुंदर कलाकारी करके ऊंची ऊंची गुंबद नुमा ताजिया बनाएं।  और नाचते गाते गम मनाते या हुसैन के नारे लगाते।

  क्या जलवा कर्बला में दिखाया हुसैन ने सजदे में जाकर सर कटाया हुसैन ने।

ऐसे नारों के साथ धूमधाम से ताजिया को लेकर कर्बला पहुंचे ताजियों को सुंदर सुंदर झांकियों से सजाया और एक शहीद की अर्थी को इतना सम्मान देते हुए

उसे ले जाकर कर्बला में दफन कर दिया गया।  इसी तरह के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पूरे प्रयागराज

में अलग-अलग क्षेत्रों में मोहर्रम का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया।  जिसमें महिलाएं बुजुर्ग बच्चे युवा सभी शामिल हुए।

मुस्लिम समुदाय का यह मोहर्रम का पर्व इसको देखने के लिए हर मजहब के लोग उमड़ पड़ते हैं।  और बड़ी ही सुंदर सुंदर झांकियों को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। [ रिपोर्ट जीशान अहमद]