धोखाधड़ी से पैसा कमाने के लिए 12 वीं पास युवक ने फिल्म स्कैम 1992 देखकर हाॅस्पिटल संचालक को तहसीलदार के नाम पर भेजा फर्जी नोटिस

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जबलपुर। थाना गोहलपुर अंतर्गत 15 जून की रात्रि में डाक्टर अब्दुल लतीफ खान ने लिखित शिकायत की कि उसका के.जी.एन. लकवा यूनिट के नाम से नर्मदा नगर रद्दी चैकी जबलपुर में अस्पताल है उसे एक पत्र न्यायालय तहसीलदार जिला जबलपुर के नाम से जिसमें प्रकरण क्रमांक 78/अ-68/2021 दिनांक 9 मार्च 21 दर्शित है का कारण बताओ नोटिस प्राप्त हुआ जिसमे पेशी दिनंाक 26-3-2021 लिखी हुई थी, नोटिस प्राप्ति के दूसरे दिन उसे अज्ञात व्यक्ति जिसने अपना नाम मोहित बताया ने काॅल किया तथा उक्त प्रकरण केा समाप्त करने के संबंध में बात की और अधिकारियों केा पैसे देने पड़ेगें ऐसा कहकर प्रकरण समाप्त करने के लिये 1 लाख 50 हजार रूपये की मांग की , उसने उसे विचार करने का कहते हुये समय ले लिया ।

सेटलमेंट के लिए माँगा डेढ़ लाख

नियत दिनंाक को वह तहसील कार्यालय पहुचा तो पता चला कि ऐसा केाई पत्र तहसीलदार कार्यालय से जारी नही हुआ है पुनः उसे दिनंाक 6-6-21 को उसी प्रकरण क्रमांक का द्वितीय कारण बताओ नोटिस प्राप्त हुआ है जिसमे पेशी दिनंाक 14-6-21 लिखी हुयी थी, पुनः उसी व्यक्ति का फोन उसे आया जिसने कहा कि अगर पैसे नहीं दिये तो बरबाद हो जाओगे, उस व्यक्ति से उसने पैसे देने के लिये समय लिया, और दिनंाक 14-6-21 को उसने तहसीलदार कार्यालय से सम्पर्क कर प्रकरण की जानकारी ली तो पता चला कि ऐसा केाई प्रकरण उसके नाम पर दर्ज नहीं है और उक्त दोनेां नोटिस फर्जी हैं अज्ञात व्यक्ति के द्वारा फर्जी कारण बताओ नोटिस देकर उसे ब्लेकमेल कर पैसों की मांग की जा रही है शिकायत पर धारा 420, 384 भादवि का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

वेब सीरीज स्कैम 1992 द हर्षद मेहता स्टोरी’
आपको बता दें कि हाल ही में ओटीटी प्लैटफॉर्म सोनी लिव पर वेब सीरीज ‘स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी’ रिलीज हुई थी। यह वेब सीरीज साल 1992 में हर्षद शांतिलाल मेहता के स्टॉक एक्सचेंज फ्रॉड को बखूबी दिखाया गया है। इस फ्रॉड में हर्षद मेहता ने देश के कई नामी बैंकों से 5000 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया था। उनके इस फ्रॉड को पत्रकार सुचेता दलाल और देबाशीष ने खोजी पत्रकारिता कर लोगों के सामने उजागर किया था। दोनों ने मिलकर ‘द स्कैम’ किताब लिखी और इसी किताब पर ये वेब सीरीज बनी है। इसे हंसल मेहता ने डायरेक्ट किया है।
12 वीं पास युवक के कारनामे
सायबर सेल की मदद से मोबाईल के धारक के सम्बंध मे पतासाजी करते हुये मोबाईल धारक मोह. हमजा पिता मोह. नियाज उम्र 18 वर्ष निवासी हाउसिंग बोर्ड कालोनी हनुमानताल को अभिरक्षा मे लेकर सघन पूछताछ करने पर बताया कि वह भेडाघाट की सीनरी बनाने के साथ साथ पढाई करता था इस वर्ष 12 वीं पास किया है। लाॅकडाउन के कारण वह बेरोजगार हो गया है, लाॅकडाउन के समय उसने स्कैम 1992 वैब सीरिज आॅनलाईन देखी थी जिसमें सीरिज के हीरो द्वारा लोगों के साथ धोखाधड़ी कर पैसा कमाना बताया गया है।

डाक्टर की डिग्री मे दस्तावेजों को जांचने के लिए ट्यूब पर सर्च पर किया
उसी दौरान उसे पता चला कि सैफ नगर गोहलपुर स्थित के.जी.एन. लकवा युनिट अस्पताल के डाक्टर की डिग्री एवं मान्यता फर्जी है, उसने गूगल एवं यू ट्यूब पर सर्च कर यह जानकारी प्राप्त की कि अस्पताल की मान्यता एवं डाक्टर की डिग्री की जांच मे किन-किन दस्तावेजों की मांग की जाती है तथा रजा चैक स्थित एक फोटो काॅपी की दुकान से तहसीलदार कार्यालय जबलपुर का फर्जी लैटर तैयार कर के.जी.एन. लकवा युनिट अस्पताल भेजा तथा अस्पताल के मालिक डाक्टर अब्दुल लतीफ को फोन कर बोला कि मै एसडीएम कार्यालय जबलपुर से बोल रहा हूॅं, तुम्हारी जांच है, जांच मैं सैटेल करा दूंगा, डेढ लाख रूपये लगेंगे।

मोह. हमजा से जांच खारिज करने का कलेक्ट्रेट कार्यालय का 1 फर्जी पत्र, 1 मोबाईल, जप्त करते हुये प्रकरण में विधिवत गिरफ्तार कर मोह. हमजा के द्वारा और किन किन लोगो के साथ उक्त प्रकार का कृत्य किया गया है एवं फर्जी लैटर कैसे और कहाॅ तैयार करता था के सम्ंबध में पूछताछ हेतु मान्नीय न्यायालय के समक्ष पेश कर पुलिस रिमाण्ड लिया जा रहा है।