भारतीय बाल्य चिकित्सा अकादमी प्रयागराज ने बच्चों के विकास के विषय पर सेमिनार का किया आयोजन

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प्रयागराज :प्रयागराज भारतीय बाल्य चिकित्सा अकादमी प्रयागराज के तत्वावधान में बच्चों के मानसिक तथा शारिरिक विकास के विषय पर एक सेमिनार का आयोजन मेडिकल एसोसिएशन प्रयागराज के सभागार में 17 मार्च को किया गया।नागपुर से आयी इस विषय की विशेषज्ञ डॉ मीनाक्षी गिरीश ने बच्चों के विकास से संबंधित विकलांगता तथा सेरिब्रल पाल्सी के विषय में विस्तार से बताया। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि बच्चों के विकास में अवरोध तथा विकलांगता का जितनी जल्दी पता लगा लिया जाये और जितनी जल्दी उस का उपचार किया जाये उतने ही अच्छे परिणाम मिलते हैं तथा बच्चों को विकलांगता से बचाया जा सकता है।बच्चों के माता पिता को इस विषय में उचित मार्गदर्शन तथा सलाह देने से उन्हें हाई रिस्क बच्चों के उपचार तथा विकास में बहुत अधिक सुधार किया जा सकता है। माता पिता से केवल ये कह देना कि आप के बच्चे के दिमाग को बहुत अधिक नुकसान पहुंच चुका है और अब कुछ नहीं किया जा सकता ऐसा कहना बहुत गलत होगा।

श्रीमती नीलू सोमानी जो कि एक प्रसिद्ध श्रवण एवं वाणी विशेषज्ञ हैं उन्होंने वाणी तथा श्रवण दोषों के शीघ्र निदान पर विशेष बल दिया। 2011 कि जनगणना में यह पाया गया कि बहरापन बच्चों में विकलांगता का प्रमुख कारण है। बच्चों में जन्मजात गूंगेपन का प्रमुख कारण बहरापन है।बहरापन तंत्रिका विज्ञान की एक इमरजेंसी है। तीन वर्ष तक बच्चे के मस्तिष्क का 82 प्रतिशत विकास हो जाता है, इसलिये बहरेपन का निदान और चिकित्सा छह माह से तीन वर्ष तक हो जाना अति आवश्यक है। जन्मजात बहरे बच्चों को हियरिंग एड तथा कॉक्लियर इम्प्लांट से बहुत अधिक लाभ होता है।
सेमिनार में व्याख्यानों के बाद इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गयी। डॉ अमित शेखर ने गेस्ट लेक्चर भी दिया। सेमिनार में प्रयागराज तथा अन्य शहरों से आए 60 से अधिक बाल्य रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया। सेमिनार का संचालन इंडियन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स प्रयागराज  की सचिव डॉ इशिता बनर्जी, अध्यक्ष डॉ पार्वती मूर्ति तथा कोषाध्यक्ष डॉ शुभा मालवीय ने किया।मीडिया से बात करते हुए सभी मौजूद विशेषज्ञों ने कहां कि मीडिया के माध्यम से समाज में सभी मां बाप तक इन बातों को पहुंचना बहुत जरूरी है जिससे बच्चों को होने वाली इस तरीके की परेशानियां का निदान किया जा सके|[ब्यूरो रिपोर्ट प्रयागराज]