लोक अदालत में 1165 व्यक्ति हुये लाभान्वित ‘ नेशनल लोक अदालत ‘

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एक करोड़ 42 लाख रूपये से अधिक की हुई वसूली, पक्षकारों को निःशुल्क औषधीय एवं फलदार पौधे प्रदान किये गये, लोक अदालत हेतु 23 न्यायिक खण्डपीठों का गठन किया गया

टीकमगढ़ @ जिले में शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत में 202 आपराधिक शमनीय प्रकरण, 24 चैक बाउन्स के प्रकरण, 24 मोटर दुर्घटना दावा के प्रकरण, विद्युत विभाग के 180 लंबित प्रकरण, 8 वैवाहिक प्रकरणों एवं 37 सिविल प्रकरणों के साथ न्यायालय में लंबित कुल 556 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इसमें 1165 व्यक्ति लाभान्वित हुये। इसी प्रकार नगरीय निकाय, विद्युत विभाग तथा बैंक रिकवरी प्रकरण में कुल 773 प्रकरणों का निराकरण किया गया जिसमें एक करोड़ 42 लाख 43 हजार 63 रूपये की वसूली की गयी। कतरौलिया ने उक्त जानकारी देते हुये बताया कि राजीनामा करने वाले पक्षकारों को निःशुल्क औषधीय एवं फलदार पौधे प्रदान किये गये जो न्याय वृक्ष के रूप में यादगार रहेंगे।

ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशानुसार एवं जिला न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अरूण कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में 9 सितम्बर 2017 को जिले में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया है। नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ एडीआर सेंटर जिला न्यायालय परिसर टीकमगढ़ में जिला न्यायाधीश अरूण कुमार शर्मा द्वारा मां सरस्वती एवं गांधीजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन कर किया गया। नेशनल लोक अदालत के शुभारंभ के अवसर पर मुख्य रूप से अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष आरएस तोमर, विशेष न्यायाधीश एवं नेशनल लोक अदालत के नोडल अधिकारी डॉ. सुभाष जैन, अपर जिला न्यायाधीश दिलीप कुमार मित्तल, सुनील कुमार, नीतूकांता वर्मा, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी एसके गुप्ता, न्यायाधीशरण रामसहारे राज, परमानंद चौहान, अमर सिंह सिसौदिया, कु. प्रिंयका बुन्देला, शासकीय अधिवक्ता अशोक गोइल सहित अधिवक्तागण एवं लोक अभियोजन अधिकरीगण उपस्थित रहे।

नेशनल लोक अदालत में प्रकरणों के निराकरण हेतु टीकमगढ़ जतारा, निवाड़ी एवं ओरछा में कुल 23 न्यायिक खण्डपीठों का गठन किया गया था। नेशनल लोक अदालत में समझौता योग्य आपराधिक प्रकरण, सिविल प्रकरण, चैक बाउन्स प्रकरण, पारिवारिक एवं वैवाहिक प्रकरण, विद्युत विभाग में संबंधित प्रकरण, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, श्रम अधिनियम से संबंधित प्रकरण, बैंक बसूली प्रकरण, नगरीय निकाय प्रकरण एवं अन्य राजीनामा योग्य प्रि-लिटिगेशन तथा न्यायालय में लंबित प्रकरणों को निराकरण हेतु रखा गया था।