देश के सभी गाँवों का हुआ शत प्रतिशत विद्युतीकरण

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अंधकार में, बिना बिजली जीवन जीना क्या होता है, इसका अंदाज़ा सिर्फ़ वही लगा सकता है जिसने इस मुश्किल को सहा हो इसीलिए 21वीं शताब्दी में भी देश के 18 हज़ार से ज़्यादा गाँवों को जब इस अभीशाप से छुटकारा मिला और उनकी ज़िंदगी भी बिजली की रोशनी से रोशन हुई तो देश ने विकास का एक अहम पड़ाव पार कर लिया। 28 अप्रैल को देश के आख़िरी गाँव तक भी बिजली पहुँच गई जिसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2015 को देश से जो वादा किया था, वो भी पूरा कर दिखाया।

आज़ादी के 7 दशक बाद भी देश के 18,452 गाँव अंधेरे में ज़िंदगी जीने को मजबूर थे जब 25 ज़ुलाई, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मात्र 1000 दिनों में इन्हे इस अभिशाप से निजात दिलाने का संकल्प लिया और इसी के साथ देश ने अपनी विकास गाथा में एक अहम मुकाम हासिल कर लिया।

किसी गांव को तब बिजली से जुड़ा घोषित किया जाता है जब बिजली सप्लाई के आधारभूत ढांचे के साथ वहां के कुल घरों के 10 प्रतिशत घरों तक बिजली पहुंच गई हो और सार्वजनिक स्थानों, स्कूल, पंचायत, स्वास्थ्य केंद्र, दिस्पेंसरी और सामुदायिक भवनों तक बिजली पहुंच जाए।

मणिपुर में सेनापति जिले का लिसांग गांव देश का आख़िरी गाँव था जो बिजली से रोशन हुआ. इन गांवों में से ज़्यादातर गांव दूरदराज़ या दुर्गम स्थानों पर थे जिस वजह से इनके विद्युतीकरण में अनगिनत मुश्किलें भी आईं लेकिन आख़िरकार सभी गांवों में नेशनल ग्रिड या ऑफ ग्रिड से बिजली पहुंचा दी गई है…इसी के साथ देश में प्रति व्यक्ति बिजली खपत अब 1200 किलोवॉट पर पहुंच गई जो पहले दुनिया में सबसे कम थी.

देश के हर घर को 24 घंटे बिजली सप्लाई और किसानों के लिए भी पर्याप्त बिजली की मांग को देखते हुए फीडर को अलग करने, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क सुधारने, कनेक्शन से मीटर जोड़ने, गांवों में बिजलीकरण और माइक्रो-ऑफ ग्रिड नेटवर्क तैयार करने जैसी चुनौतियों से पार पाया जा रहा है।

देश के हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना यानी सौभाग्य योजना के क्रियान्वयन में तेज़ी लाई जा रही है देश के लगभग 18 करोड़ ( 17,99,41,456) घरों में से 17 % (3,13,65,992) तक बिजली पहुँचनी बाकी है..ताकि 31 मार्च, 2019 तक देश के हर घर में चौबीसों घंटे गुणवत्तापूर्ण, निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। ये एक ऐसा बदलाव है जो लोगों की ज़िंदगी ही नहीं इन क्षेत्रों का नक्शा ही बदल देगा और इन्हे सशक्तिकरण की राह पर आगे ले जाएगा।